मुसहर समुदाय की वैश्विक अकादमिक विमर्श तक पहुँच: एक ग्रंथमितीय विश्लेषण एवं वैज्ञानिक मानचित्रीयकरण

Authors

  • डॉ. सुमन पाल पी-एच.डी., शिक्षा विद्यापीठ, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा, महाराष्ट्र Author

Keywords:

मुसहर समुदाय, वैश्विक पहुँच, वीओएस व्युवर, वैज्ञानिक मानचित्रण, नेटवर्क दृश्यीकरण एवं सघनता दृश्यांकन

Abstract

मुसहर समुदाय सामाजिक-शैक्षिक रूप से मुख्य समाज से कटा हुआ एक सजातीय बंद समूह के रूप में जीवन व्यतीत करता है। उनकी एक सुव्यवस्थित एवं सुनिश्चित जीवन जीने की परिपाटी अर्थात एक अद्वितीय जीवन दर्शन और संस्कृति है। ये अपनी अद्वितीय संस्कृति, ज्ञान प्रणाली और विशिष्ट जीवन दर्शन के आधार पर वैश्विक अनुसंधानकर्त्ताओं को बहुत आकर्षित करते हैं। वैश्विक अकादमिक दुनिया में मुसहर समुदाय पर बहुत अधिक शोध अध्ययन हुआ है। इन शोध अध्ययनों की वैश्विक पहुँच कहाँ तक है, मुसहर समुदाय संबंधित अनुसंधान का ट्रेंड कैसा है, किस देश में सर्वाधिक अनुसंधान किए जा रहे हैं, कौन-कौन से संस्थान सर्वाधिक अनुसंधानिक उत्पादन कर रहे हैं, मुसहर समुदाय संबंधित सर्वाधिक अनुसंधानकर्त्ता कौन हैं और सर्वाधिक उत्पादक स्रोत कौन हैं; इत्यादि सवालों की पड़ताल करना ही इस अध्ययन का मुख्य सरोकार है। इसके लिए ‘डायमेंशन डेटाबेस’ की सहायता से संकलित 654 प्रकाशनों का वीओएस व्युवर सॉफ्टवेयर की सहायता से मात्रात्मक विश्लेषण करते हुए वैज्ञानिक दृश्यीकरण किया गया है। शोध परिणाम से स्पष्ट है कि मुसहर समुदाय संबंधित अनुसंधान कुल 41 देशों के विभिन्न संस्थानों में किए गए हैं। सर्वाधिक उत्पादक देश भारत, नेपाल और संयुक्त राज्य अमेरिका हैं। सर्वाधिक उत्पादक संस्थान त्रिभुवन विश्वविद्यालय, जेएनयू और दिल्ली विश्वविद्यालय हैं। सर्वाधिक उत्पादक अनुसंधानकर्त्ता इंद्रजीत राय एवं मिरियम शर्मा हैं। 

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Published

2026-07-25

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Articles